Thursday, August 8, 2019

ज्वालामुखी शक्तिपीठ / jvaalaamukhee shaktipeeth | जहां पर अकबर को भी झुकना पड़ा था

ज्वालामुखी शक्तिपीठ / jvaalaamukhee shaktipeeth | जहां पर अकबर को भी झुकना पड़ा था

मां ज्वाला जी मंदिर बहुत ही प्राचीन मंदिर है, जो कि कांगड़ा जिले के ज्वालामुखी शहर में हिमाचल प्रदेश तथा हिमालय के निचले क्षेत्र में स्थित है ,ज्वाला जी का मंदिर माता ज्वाला जी जिन्हें ज्वाला देवी जी के नाम से भी जाना जाता है को समर्पित है, ज्वाला माता जी का मंदिर धर्मशाला से लगभग 55 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, प्राचीन ग्रंथों और ज्योतिषियों के आधार पर ऐसा माना जाता है के इस मंदिर में माता ज्योति रूप में विराजमान है और इसी ज्योति के आगे शहंशाह अकबर को भी झुकना पड़ा था , उनके अहंकार को ज्वाला माता जी ने चूर चूर किया अहंकार टूटने के बाद शहंशाह अकबर ने माता के आगे नतमस्तक होकर नमस्कार किया, और माता जी को एक सोने का छत्तर भी चढ़ाया, जिसके बारे में एक अलग से कहानी विख्यात है|
ज्वालामुखी शक्तिपीठ / jvaalaamukhee shaktipeeth | जहां पर अकबर को भी झुकना पड़ा था
ज्वालामुखी शक्तिपीठ / jvaalaamukhee shaktipeeth | जहां पर अकबर को भी झुकना पड़ा था

जब शहंशाह अकबर को भी माता के दरबार में झुकना पड़ा था 

 शहंशाह अकबर के सिपाहियों ने जब ध्यानू भगत जी को माता ज्वाला जी के मंदिर में पूजा अर्चना करते हुए देखा, तो उन्होंने ध्यानू भगत जी से माता के अद्भुत रूप के बारे में जानने की कोशिश की तब ध्यानू भगत जी ने ज्वाला माता जी को भगवान रूपी दर्जा देते हुए जगत जननी बताया और ठीक वैसे ही शहंशाह अकबर के सिपाहियों ने अपने शहंशाह को माता ज्वाला जी के बारे में बताया, परंतु शहंशाह अकबर शहंशाह के साथ साथ अहंकारी भी थे, उन्होंने माता की परीक्षा लेनी चाही इसके चलते उन्होंने अपने सिपाहियों से मंदिर में जल रही ज्योति को बुझाने के लिए कहा , लाख कोशिशों के बाद भी जब मंदिर में जल रही ज्योतियां नहीं बुझी तब शहंशाह अकबर माता के दरबार में नतमस्तक हो गए, और उन्होंने सोने का छत्र चढ़ाया जो आज भी ज्वाला जी में देखा जा सकता है परंतु माता ज्वाला जी ने शहंशाह अकबर के इस अहंकारी तोहफे को कबूल नहीं किया शहंशाह अकबर के हाथों से वह सोने का छत्र नीचे धरती पर गिर गया और किसी अलग धातु में परिवर्तित हो गया|

ज्वाला जी आज भी कर रही हैं अपने  भक्त का इंतजार

गुरु गोरखनाथ माता ज्वाला जी के बहुत बड़े भक्त थे,  ग्रंथों और ज्योतिषियों के आधार पर ऐसा कहा जाता है , के एक बार गुरु गोरखनाथ जी को भूख लगी और उन्होंने ज्वाला माता जी को भोजन पकाने के लिए अग्नि जलाने को कहा और खुद दीक्षा लेने चले गए जाते जाते उन्होंने माता जी से यह कहा कि जब तक वह भिक्षा लेकर वापस नहीं आते तब तक आप उनका इंतजार करिए और अग्नि को जलाए रखें ऐसी मान्यता है के ज्वाला माता जी आज भी अपने  भक्त गोरखनाथ जी के इंतजार में ज्योति रूप अग्नि को जलाए हुए हैं ऐसा कहा जाता है के गुरु गोरखनाथ कलयुग के अंत में भिक्षा लेकर आएंगे और अपनी माता ज्वाला जी के हाथों से भोजन प्राप्त करके कृतार्थ होंगे|

माता सती की जिह्वा गिरने के कारण यह स्थान ज्वाला जी के नाम से प्रसिद्ध हुआ

 ज्वाला जी में माता सती की जिह्वा गिरी थी , इसीलिए इस स्थान को ज्वाला जी के नाम से जाना जाता है लगातार इस स्थान पर माता की नौ ज्योतियां लगातार बिना किसी भी बाती के जल रही हैं यहां धरती से अलग-अलग जगहों में ज्वालाए निकल रही हैं जिनकी गिनती नो है ऐसी मान्यता है के इन अलग-अलग ज्योतियों को महाकाली, अन्नपूर्णा ,चंडी ,हिंगलाज ,विंध्यवासिनी ,महालक्ष्मी ,सरस्वती ,अंबिका ,अंजी देवी के नाम से जाना जाता है यह  स्थान शक्तिपीठों में गिना जाता है माता की जिह्वा गिरने के कारण यह स्थान शक्तिपीठों में आता है कहते हैं जहां जहां माता सती के अंग गिरे थे वह स्थान अलग अलग शक्तिपीठों में गिने जाते हैं ज्वालाजी इन्हीं शक्तिपीठों में से एक है|

Monday, July 22, 2019

किरीट – विमला (भुवनेशी) शक्तिपीठ/Kirit - Vimala (Bhubaneshi) Shaktipeeth.

किरीट – विमला (भुवनेशी) शक्तिपीठ/Kirit - Vimala (Bhubaneshi) Shaktipeeth.

पश्चिम बंगाल की हुगली नदी के तट पर लालबाग कोर्ट के किरीट कौन ग्राम पर किरीट शक्तिपीठ स्थित है धार्मिक ग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर इस शक्तिपीठ पर माता सती के शीश का मुकुट गिरा था|

किरीट – विमला (भुवनेशी) शक्तिपीठ/Kirit - Vimala (Bhubaneshi) Shaktipeeth.behtreenkhabar
किरीट – विमला (भुवनेशी) शक्तिपीठ/Kirit - Vimala (Bhubaneshi) Shaktipeeth.

धार्मिक मान्यताओं के आधार पर शक्तिपीठों के बारे में जानकारी/Information About Shakti Peethas Based On Religious Beliefs.

धार्मिक ग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर ऐसा कहा जाता है के शिव शंकर जी की धर्मपत्नी माता सती के पिताजी दक्ष प्रजापति जी ने एक बहुत ही बड़े यज्ञ का आयोजन किया, उसमें उन्होंने सभी देवताओं को आमंत्रित किया, किंतु उन्होंने अपनी पुत्री माता सती और उनके पति शिव शंकर जी को आमंत्रित नहीं किया, जिससे नाराज होकर माता सती बिना अपने पति  की आज्ञा से अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ समारोह में चली गई, वहां जाकर दक्ष के द्वारा उनको बहुत बुरा भला कहा गया और उनके पति शिव शंकर जी के बारे में दक्ष ने बहुत ही अपशब्द कहे, माता सती अपने पति के बारे में यह सब असहनीय शब्द सुन ना सकी और गुस्से में आकर उन्होंने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में कूदकर अपनी जान दे दी,जब शिव शंकर जी को अपनी धर्मपत्नी माता सती की मृत्यु के बारे में पता लगा तो वह  बहुत ही गुस्से में आ गए और उन्होंने अपने रूद्र अवतार (वीरभद्र ) को दक्ष प्रजापति की हत्या के लिए भेजा उनके रूद्र अवतार (वीरभद्र )  ने दक्ष प्रजापति की हत्या कर दी ,लेकिन शिव शंकर जी अपनी धर्मपत्नी माता सती के शव को उठाकर पूरी दुनिया में भ्रमण करने लगे, जिससे धरती का संतुलन बिगड़ने लगा सब और त्राहिमाम त्राहिमाम होने लगा ,सब देवता गण धरती की यह दशा देखकर धरती के संचालन श्री नारायण जी के पास गए , तब नारायण जी ने अपने चक्र सुदर्शन चक्र की सहायता से माता सती के अंगों को 51 भागों में विभाजित कर दिया , यह 51  अंग जहां जहां पर गिरे आज के युग में वहीं पर माता जी का भव्य मंदिर का निर्माण किया हुआ है आपको बता दें जहां जहां   माता सती जी के 51 अंग  गिरे वही 51 जगह 51  शक्ति पीठ कहलाए|


किरीट विमला शक्ति पीठ के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी/Some important information about Kirit Vimala Shakti Peeth.



स्थान: किरतेश्वरी, पश्चिम बंगाल 742104
समय: सुबह 06:00 खुलने का समय  और रात 10:00 बजे बंद होने का समय
आरती के दौरान, मंदिर थोड़ी अवधि के लिए बंद रहता है।
यात्रा करने का सर्वोत्तम समय: अक्टूबर से मार्च
निकटतम रेलवे स्टेशन: किर्तेश्वरी मंदिर से लगभग 3.2 किलोमीटर की दूरी पर दहपारा रेलवे स्टेशन।
निकटतम हवाई अड्डा: नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा किरीतेश्वरी मंदिर से लगभग 239 किलोमीटर की दूरी पर।
प्रमुख त्योहार: विजयादशमी, दुर्गा पूजा और नवरात्रि।


पुराणों और ग्रंथों के आधार पर किरीट विमला को मुक्तेश्वरी मंदिर के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस स्थान पर माता सती जी का  मुकुट गिरा था किरीट विमला शक्ति पीठ 51 शक्तिपीठों में से एक है यहां की शक्ति विमला अथवा भुवनेश्वरी तथा भैरव संवर्त  है|

51 शक्तिपीठो के बारे में जाने

51 शक्तिपीठो के बारे में जाने | Know about 51 Shakti Peethas

कुछ आवश्यक जानकारी / Some essential information.

भारतीय अध्यात्म में शक्तिपीठों का बहुत अधिक महत्व है, हमने भारतीय शक्तिपीठो की सूचि धार्मिक ग्रंथो और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर प्रपात की है , हमने इन धार्मिक शक्तिपीठो का इतिहास और इन तक पहुंचने की सारी जानकारी बड़ी ही सरलता से देने की कोशिश की है , आशा करते है के आप सभी को हमारी यह पुरजोर कोशिश अच्छी लगे ,धन्यवाद| 
51 शक्तिपीठो के बारे में जाने | Know about 51 Shakti Peethas ,behtreenkhabar
51 शक्तिपीठो के बारे में जाने | Know about 51 Shakti Peethas 


धार्मिक मान्यताओं के आधार पर शक्तिपीठों के बारे में जानकारी/Information about Shakti Peethas based on religious beliefs.

धार्मिक ग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर ऐसा कहा जाता है के शिव शंकर जी की धर्मपत्नी माता सती के पिताजी दक्ष प्रजापति जी ने एक बहुत ही बड़े यज्ञ का आयोजन किया, उसमें उन्होंने सभी देवताओं को आमंत्रित किया, किंतु उन्होंने अपनी पुत्री माता सती और उनके पति शिव शंकर जी को आमंत्रित नहीं किया, जिससे नाराज होकर माता सती बिना अपने पति  की आज्ञा से अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ समारोह में चली गई, वहां जाकर दक्ष के द्वारा उनको बहुत बुरा भला कहा गया और उनके पति शिव शंकर जी के बारे में दक्ष ने बहुत ही अपशब्द कहे, माता सती अपने पति के बारे में यह सब असहनीय शब्द सुन ना सकी और गुस्से में आकर उन्होंने अपने पिता दक्ष प्रजापति के यज्ञ में कूदकर अपनी जान दे दी,जब शिव शंकर जी को अपनी धर्मपत्नी माता सती की मृत्यु के बारे में पता लगा तो वह  बहुत ही गुस्से में आ गए और उन्होंने अपने रूद्र अवतार (वीरभद्र ) को दक्ष प्रजापति की हत्या के लिए भेजा उनके रूद्र अवतार (वीरभद्र )  ने दक्ष प्रजापति की हत्या कर दी ,लेकिन शिव शंकर जी अपनी धर्मपत्नी माता सती के शव को उठाकर पूरी दुनिया में भ्रमण करने लगे, जिससे धरती का संतुलन बिगड़ने लगा सब और त्राहिमाम त्राहिमाम होने लगा ,सब देवता गण धरती की यह दशा देखकर धरती के संचालन श्री नारायण जी के पास गए , तब नारायण जी ने अपने चक्र सुदर्शन चक्र की सहायता से माता सती के अंगों को 51 भागों में विभाजित कर दिया , यह 51  अंग जहां जहां पर गिरे आज के युग में वहीं पर माता जी का भव्य मंदिर का निर्माण किया हुआ है आपको बता दें जहां जहां   माता सती जी के 51 अंग  गिरे वही 51 जगह 51  शक्ति पीठ कहलाए|

शक्तिपीठो की संख्या /Number of Shakti Peeths.

देवी पुराण में 51 शक्तिपीठो की जानकारी मिलती है। और देवी भागवत में 108 और देवी गीता में 72 शक्तिपीठों का वर्णन मिलता है, इनके आलबा तन्त्रचूडामणि में 52 शक्तिपीठ का वर्णन मिलता हैं। ज्ञातव्य है की इन 51 शक्तिपीठों में से, 5 और भी कम हो गए। भारत-विभाजन के बाद भारत में 42 शक्ति पीठ रह गए है। इन शक्तिपीठो मे से 1 शक्तिपीठ पाकिस्तान में चला गया और 4 बांग्लादेश में। बचे हुए 4 पीठो में 1 श्रीलंका में, 1 तिब्बत में तथा 2 नेपाल में है।

शक्तिपीठों के नाम /Names of Shaktipeethas.


किरीट शक्तिपीठ | कात्यायनी शक्तिपीठ | करवीर शक्तिपीठ | श्री पर्वत शक्तिपीठ | विशालाक्षी शक्तिपीठ | गोदावरी तट शक्तिपीठ | शुचीन्द्रम शक्तिपीठ | पंच सागर शक्तिपीठ | ज्वालामुखी शक्तिपीठ | भैरव पर्वत शक्तिपीठ | अट्टहास शक्तिपीठ | जनस्थान शक्तिपीठ | कश्मीर शक्तिपीठ या अमरनाथ शक्तिपीठ | नन्दीपुर शक्तिपीठ | श्री शैल शक्तिपीठ | नलहटी शक्तिपीठ | मिथिला शक्तिपीठ | रत्नावली शक्तिपीठ | अम्बाजी शक्तिपीठ | जालंध्र शक्तिपीठ | रामागरि शक्तिपीठ | वैद्यनाथ शक्तिपीठ | वक्त्रोश्वर शक्तिपीठ | कण्यकाश्रम कन्याकुमारी शक्तिपीठ | बहुला शक्तिपीठ | उज्जयिनी शक्तिपीठ | मणिवेदिका शक्तिपीठ | प्रयाग शक्तिपीठ | विरजाक्षेत्रा, उत्कल शक्तिपीठ | कांची शक्तिपीठ | कालमाध्व शक्तिपीठ | शोण शक्तिपीठ | कामाख्या शक्तिपीठ | जयन्ती शक्तिपीठ | मगध् शक्तिपीठ | त्रिस्तोता शक्तिपीठ | त्रिपुरी सुन्दरी शक्तित्रिपुरी पीठ | विभाष शक्तिपीठ | देवीकूप पीठ कुरुक्षेत्र शक्तिपीठ | युगाद्या शक्तिपीठ, क्षीरग्राम शक्तिपीठ | विराट का अम्बिका शक्तिपीठ | कालीघाट शक्तिपीठ | मानस शक्तिपीठ | लंका शक्तिपीठ | गण्डकी शक्तिपीठ | गुह्येश्वरी शक्तिपीठ | हिंगलाज शक्तिपीठ | सुगंध शक्तिपीठ | करतोयाघाट शक्तिपीठ | चट्टल शक्तिपीठ | यशोर शक्तिपीठ

ध्यान दें : ऊपर लिखित सभी जानकारी धार्मिक ग्रंथों और धार्मिक मान्यताओं के आधार पर ही है बेहतरीन खबर इस बात की पुष्टि करने में असमर्थ है